अपनी सौंवी पोस्ट पर

सोमवार, 30 नवम्बर 2009

शतक / सैकड़ा / शतांक केवल लुभाता भर नही है बल्कि एकाग्रता बढ़ाता है, जिम्मेदारियों को महसूसना सिखाता है, निरन्तरता बनाये रखने की प्रेरणा देता है। अपनी सौंवी पोस्ट पर मैं सभी ब्लॉग साथियों का शुक्रगुजार हूँ कि आपकी सुलभ प्रेरणा, प्रतिक्रियायें मेरा मार्गदर्शन करती रहीं अन्यथा मैं तो अपनी आदत के मुताबिक कुछ भी स्थायी नही रख पाता हूँ मात्र एक उलझा-उलझा जिन्दगी की मुश्किलों की सुलझाने की कोशिश में खुद को ही भूल बैठता हूँ कभी।

आज मैं अपनी एक पुरानी कविता "मैं, तुम, बेटा और दीवारें" प्रस्तुत कर रहा हूँ इस कविता ने मेरे बहुत से साथियों को श्रोताओं को गोष्ठियों में करीब से छुआ है।

सादर,

आपका स्नेहाकांक्षी



मुकेश कुमार तिवारी
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मैं, तुम, बेटा और दीवारें



अक्सर,
रातों को
मैं, तुम, बेटा और दीवारें
बस इतना ही बड़ा संसार होता है
बेटे की अपनी दुनिया है / उसके अपने सपने
दीवारें कभी बोलती नही
और हमारे बीच अबोला
बस इतना ही बड़ा संसार होता है


तुम्हारे पास है
अपने ना होने का अहसास /
बेरंग हुये सपने /
और दिनभर की खीज
मेरे पास है
दिनभर की थकान /
पसीने की बू
और वक्त से पीछे चल रहे माँ-बाप


ना,
तुमने मुझे समझने की कोशिश की
ना मैं समझ पाया तुम्हें कभी
तुम्हारे पास हैं थके-थके से प्रश्न
मेरे पास हारे हुये जवाब
अब हर शाम गुजर जाती है
तुम्हारे चेहरे पर टंगी चुप्पी पढ़ने में
रात फिर बँट जाती है
मेरे, तुम्हारे, बेटे और दीवारों के बीच
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मुकेश कुमार तिवारी

32 टिप्पणियाँ

ललित शर्मा ने कहा…

शतक की बधाई-आगे भी कई शतकों की शुभकामनाएं

30 नवम्बर 2009 12:00 pm
Mithilesh dubey ने कहा…

बहुत-बहुत बधाई आपको सौंवी पोस्ट के लिए ।

30 नवम्बर 2009 12:02 pm

सौंवी पोस्ट की बधाई .... एक उत्तम रचना है यह आपकी ....... झूझते हुवे इंसान की आत्म कथा ......

30 नवम्बर 2009 12:52 pm

बहुत बहुत बधाई आप यूँ ही लिखते रहे यही दुआ है ...बेहतरीन रचना लिखी है आपने ..शुक्रिया

30 नवम्बर 2009 12:58 pm

सुन्दर अहसास और शतक की बधाई

30 नवम्बर 2009 1:14 pm
अजय कुमार ने कहा…

शतक लगाने की बधाई,एक बेह्तरीन रचना के लिये भी बधाई

30 नवम्बर 2009 2:02 pm
मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छा शतकीय संस्करण। प्रेरक। बधाई स्वीकारें।

30 नवम्बर 2009 2:21 pm

शतक की बधाई. आपकी रचनाएं कुछ विशेष होती हैं. ईश्वर करे अगला सैकडा जल्द से जल्द लगे. बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

30 नवम्बर 2009 2:54 pm

पहले शतक की बधाई...और रचना में तो आपने कमाल कर दिया है...बहुत खूबसूरत शब्दों से भाव ढाले हैं उसमें...जितनी तारीफ़ करूँ कम है...
नीरज

30 नवम्बर 2009 3:47 pm
M VERMA ने कहा…

बहुत शानदार तरीके से आपने शतक पूरा किया है. बहुत बहुत बधाई.

रात फिर बँट जाती है
मेरे, तुम्हारे, बेटे और दीवारों के बीच
बहुत सुन्दर

30 नवम्बर 2009 4:29 pm
kshama ने कहा…

Kabhi hamaree aulad bhi hame 'waqt se pichhada " payegi...peedhi dar peedee aisahi hota raha hai...!
100 vee post ki hardik badhayee!

30 नवम्बर 2009 5:40 pm
Udan Tashtari ने कहा…

एक बहुत सशक्त रचना के साथ आपने शतक लगाया है.

शतकीय पोस्ट की बहुत बहुत बधाई एवं अनेक शुभकामनाएँ.

30 नवम्बर 2009 5:53 pm
RC ने कहा…

Perfect Poem! Perfect topic, perfect flow, wonderful words and an awesome composition!

Tones of wishes on this beautiful, 100th post! God bless your pen!

RC

30 नवम्बर 2009 8:22 pm

हमारी भी शाम दर शाम यूं ही गुजर जाती हैं। अन्तर भर यह है कि हम इतनी बढ़िया कविता में नहीं ढाल पाते उसे!
बहुत बधाई जी।

30 नवम्बर 2009 9:28 pm

सैकडे क्लब में शामिल होने की बधाई, कविता भी अच्छी लगी, आज की स्थिति को बयान करती है जब घर का लड़का इसी हालत में बापस आता है.

30 नवम्बर 2009 9:50 pm
अनूप शुक्ल ने कहा…

वाह जी वाह! बधाई हो पोस्ट-शतक लगाने के लिये।

30 नवम्बर 2009 10:45 pm
sandeep sharma ने कहा…

बहुत ही खूबसूरत लाईनें हैं..
शतक पर हमारी बधाई स्वीकारें...

30 नवम्बर 2009 10:50 pm
शरद कोकास ने कहा…

आपकी कविता पढकर यह आशा जाग रही है कि अब ब्लॉग पर अच्छी कविताओं का समय आ रहा है

30 नवम्बर 2009 11:55 pm

बहुत बहुत शुभकामनायें ।

1 दिसम्बर 2009 2:30 am
अनिल कान्त : ने कहा…

ek jandar aur shandar rachna ke sath shatak par badhai

1 दिसम्बर 2009 10:16 am

100वींपोस्ट के लिये बहुत बहुत बधाई और सुन्दर रवना के लिये भी धन्यवाद्

1 दिसम्बर 2009 11:32 am
वन्दना ने कहा…

100 VI POST KE LIYE HARDIK BADHAYI.

KAVITA KYA LIKHI HAI EK SATYA UJAGAR KAR DIYA HAI..........ZINDAGI KE KUCH LAMHAT AISE BHI GUJARTE HAIN.........INSAAN KI KHUD SE LADNE KI KAVAYAD KO BAKHUBI UJAGAR KIYA HAI.

1 दिसम्बर 2009 11:45 am
महफूज़ अली ने कहा…

बहुत-बहुत बधाई आपको सौंवी पोस्ट के लिए ।

1 दिसम्बर 2009 12:02 pm
Rajey Sha ने कहा…

मैं, तुम, बेटा और दीवारें

आज की हकीकत कह दी है आपने कवि‍ता के बहाने, आपकी पहली कवि‍ता पढ़ी है सौवीं का मजा आ गया।

1 दिसम्बर 2009 7:06 pm
Babli ने कहा…

सौवी पोस्ट के लिए हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें! बहुत अच्छी लगी आपकी ये शानदार रचना!

2 दिसम्बर 2009 7:47 pm

hamne socha jab ham 100vi post dalenge tabhi aapki 100vi rachna ka lutf lenge to janaab hamne bhi 110vi post daali aour aa dhamke aapke blog par.
maza aa gayaa kya sashakt rachna he../ abhi aour aour padhhunga...

3 दिसम्बर 2009 3:56 pm
Pankaj Upadhyay ने कहा…

पहली बार यहा आया हू और फ़ीड अपने आप रीडर मे ऎड हो गयी.... आप बहुत अच्छा लिखते है...

"तुमने मुझे समझने की कोशिश की
ना मैं समझ पाया तुम्हें कभी
तुम्हारे पास हैं थके-थके से प्रश्न
मेरे पास हारे हुये जवाब
अब हर शाम गुजर जाती है
तुम्हारे चेहरे पर टंगी चुप्पी पढ़ने में
रात फिर बँट जाती है
मेरे, तुम्हारे, बेटे और दीवारों के बीच"

मेरी तरफ़ से आपको ढेर सारी शुभकामनाये..

4 दिसम्बर 2009 12:16 pm

आप सभी की प्रेरणा और प्रोत्साहन से ही मैं निरन्तरता कायम रख पाया हूँ।

आप सभी का कृतज्ञ और ऋणी,

मुकेश कुमार तिवारी

7 दिसम्बर 2009 9:59 am
गुंजन ने कहा…

भाई,

सौंवी पोस्ट की बधाई तो है ही, रचना भी बहुत अच्छी है।

जितेन्द्र चौहान

7 दिसम्बर 2009 10:01 am
mukti ने कहा…

आपकी कविताएँ इतनी उदासी लिये क्यूँ होती हैं... ... उदास कर देती हैं...congrats for century...

26 दिसम्बर 2009 12:25 am
संजय भास्कर ने कहा…

सौंवी पोस्ट की बधाई .... एक उत्तम रचना है यह

16 अप्रैल 2010 6:31 am
संजय भास्कर ने कहा…

बहुत बहुत बधाई आप यूँ ही लिखते रहे यही दुआ है ...बेहतरीन रचना लिखी है आपने ..शुक्रिया

16 अप्रैल 2010 6:32 am