कविता : कुछ मोहब्बत भरी बातें

सोमवार, 26 सितम्बर 2011

आज चार दिन के प्रवास पर निकला हूँ और यह पहला ही दिन है और वो भी अभी पूरा नही हुआ है, कल सुबह से ही ट्रेनिंग क्लास और फिर न जाने क्या-क्या। लेकिन एक बात तो है, मैं तुम्हें मिस कर रहा हूँ...........इस वक्त भी


तुम्हें,
बड़ा अजीब सा लगता है
घर में यूँ ही सिमटे रहना
या समय काटने को
लेकर बैठ जाना
सिलाई / कढाई / चुनाई या बुनाई
अचार के लिये कैरियाँ काटते
या पापड़ के लिये आलू का मांड़ पकाते
तुम्हें लगता है
कोई रच रहा है साजिश
औरतों के खिलाफ

मैं,
नही चाहता कि
तुम किसी दिन भूल जाओ
अपना नाम भी
और गुमसुम बैठी रहो
ताकते शून्य में
भावशून्य चेहरे पर उभर आयें
आंसुओं की लकीरें

किसी,
प्रश्‍न के जवाब में
तुम्हें तलाशने हो शब्द
फिर थक-हार चुप बैठ जाना हो
या बड़ी देर बाद कुछ कहना हो धीमे से
और,
किसी प्रतिप्रश्‍न के जवाब में
सुबकते हुये थमी नज़रों से देखना हो

इसलिये,
सिर को झटककर
एक बार देखो मेरी ओर  
मुस्कुराओ
और झाडू उठाकर बुहारो
मेरा कमरा
फिर कमर में खोंसकर साड़ी
और चौखट से टिके हुये
कुछ बातें करों मुहब्बत भरी
----------------------------------
मुकेश कुमार तिवारी
दिनांक : १७-मई-२००९ / समय : ११:२० रात्रि / घर

10 टिप्पणियाँ

रविकर ने कहा…
kshama ने कहा…

Badhita,chitrmay shailee aur utnee hee sundar rachana!

26 सितम्बर 2011 9:07 pm
मनोज कुमार ने कहा…

सुंदर अभिव्यक्ति।

26 सितम्बर 2011 9:58 pm

खूबसूरती से उकेर दिए मन के भाव

26 सितम्बर 2011 11:22 pm
वन्दना ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
अवगत कराइयेगा ।

http://tetalaa.blogspot.com/

27 सितम्बर 2011 10:34 am

बेहतरीन पंक्तियाँ, छोटी छोटी बातों में छिपी है अपार खुशी।

27 सितम्बर 2011 11:12 am
सदा ने कहा…

वाह ...बहुत खूब कहा है ।

27 सितम्बर 2011 11:46 am

IS BEJOD RACHNA KE LIYE BADHAI SWIIKAREN MUKESH JI.

27 सितम्बर 2011 6:14 pm
Pradeep ने कहा…

मुकेश जी प्रणाम !
आपकी कविता की परिपक्वता लाजवाब है, ये सिर्फ भावपूर्ण रचना नहीं एक सन्देश भी है...बधाई

27 सितम्बर 2011 6:47 pm
monali ने कहा…

If ur lyf paartner knows u so well then no lady wud ever feel useless.. loved da soul of dis poem.. :)

29 सितम्बर 2011 9:03 pm