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नज़्म : सूरज संग तकादा आया

बुधवार, 8 जून 2011

जब भी दर्द बटाँ दुनिया में
मेरे हिस्से ज्यादा आया

सबने सबकी सुध ले ली
अपने काम इरादा आया

सबको मिला वही जो चाहा
मेरे हक़ में वादा आया

कर्ज रात का आँखों में ले
सूरज संग तकादा आया

दुनियादारी लगी तमाशा
तब जाना क्यूं नादाँ आया

चेहरे पुते बहुत थे लेकिन
काम यही इक सादा आया

शाह वज़ीर मस्ती में डूबे
अपनी बारी प्यादा आया
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मुकेश कुमार तिवारी
दिनाँक : 01-जून-2011 / समय : 11:40 रात्रि / घर

12 टिप्पणियाँ

Shah Nawaz ने कहा…

वाह.... बहुत खूबसूरत नज़्म... बहुत ही बेहतरीन!



प्रेम रस

8 जून 2011 को 1:49 pm
मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी नज़्म। लाजवाब!

8 जून 2011 को 5:03 pm

जो भी कहना चाहा हमने,
गजल ने साथ निभाया।

8 जून 2011 को 7:03 pm
वन्दना ने कहा…

बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

9 जून 2011 को 11:45 am
श्यामल सुमन ने कहा…

क्या बात है? मुकेश भाई - वाह - जितनी बार पढो - उतना ही मज़ा.
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

10 जून 2011 को 8:04 am
BrijmohanShrivastava ने कहा…

1आपके हिस्से में नहीं मेरे हिस्से में 2-कोई किसी की सुधि नहीं लेता 3-कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता 4-बहुत गहरी बात 5-तमाशा है ही 6-पुते हुये भी बदले हुये भी
7-........--------
जिनकी मेहनत से तुम्हे ताज मिला तख्त मिला
उनके सपनों के जनाजे में तो शामिल होते
तुमको शतरंज की चालों से नहीं वक्त मिला

10 जून 2011 को 12:15 pm

सबको मिला वही जो चाहा
मेरे हक़ में वादा आया

बहुत खूबसूरत नज़्म ... यदि इसमें नंबर न लिखे होते तो ज्यादा खूबसूरत लगती

19 जून 2011 को 1:49 pm

संगीता जी,

आपकी सलाह पर अमल किय है और अश’आरों के सामने से दिये हुए नम्बर हटा दिये हैं।

सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

19 जून 2011 को 6:49 pm

अच्छी नज़्म, अच्छे भाव। शायद हम केवल अपना दर्द ही देख पाते हैं तभी तो अपना दुख बडा लगता है\ अच्छे भाव हैं । शुभकामनायें\

20 जून 2011 को 8:26 am
M VERMA ने कहा…

कर्ज रात का आँखों में ले
सूरज संग तकादा आया

बहुत खूबसूरत गज़ल

20 जून 2011 को 12:27 pm
Rachana ने कहा…

सबको मिला वही जो चाहा
मेरे हक़ में वादा आया
bahut khub
कर्ज रात का आँखों में ले
सूरज संग तकादा आया
gahri baat kamal .
bahut sunder abhivyakti
saader
rachana

21 जून 2011 को 8:22 am

आप सभी सुधि पाठकों का आभार!!

सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

21 जून 2011 को 7:21 pm