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कविता : मैंने चुन रक्खे हैं पलाश

सोमवार, 14 मार्च 2011


मेरे होने या न होने से
क्या फर्क पड़ेगा
न होली के रंग फीके होंगे
ना बेमजा हो जायेगा भीगने का आनन्द
फागुन वैसे ही आया है
कुछ देर से
भला अब कोई मुझे तलाशे /
मेरे लिये रूके / या भागते फिरे जंगल में
चीखते पलाश के पीछे
जिन्दा रहना यूँ भी आसान तो नही है
वो भी,
इन्सानी बस्ती में
एकबार जंगल होता तो......


मेरे,
लिये न कभी रात होगी जवाँ
न किसी सुबह सूरज
पूछेगा मुझसे निकलने के पहले
यद्दपि,
भिनसारे (मुँहअंधेरे) या गोधूलि (धुंधलके) में
तुम अपना चेहरा देखोगी
आईने में तो
मेरी शक्ल नज़र आयेगी
मैं,
तुमसे कोई सवाल नही करूँगा
लेकिन
मेरी चुप!
तुम बर्दाश्त नही कर पाओगी


मैं,
अब भी वहीं हूँ वैसा ही
सिर्फ एक बार
तुम मुझे दिल से याद करो
मैंने,
चुन रक्खे हैं पलाश
तुम्हारे ऊपर अपना रंग डालने को
एक बार तुम्हें
अपने रंग में रंगना चाहता हूँ
------------------------------------------
मुकेश कुमार तिवारी
दिनाँक : 14-मार्च-2011 / समय : 1:40 दोपहर / ऑफिस(लंच ब्रेक)

16 टिप्पणियाँ

Sunil Kumar ने कहा…

होली के रंग चुनना, वह भी पलाश के फूल , बहुत अच्छी अभिव्यक्ति , बधाई

14 मार्च 2011 को 6:25 pm
Udan Tashtari ने कहा…

बहुत भावपूर्ण..

14 मार्च 2011 को 6:29 pm

अदभुद रंग बिखेर रही है कविता...

14 मार्च 2011 को 6:54 pm
Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत भावमयी प्रस्तुति..

14 मार्च 2011 को 7:02 pm
kshama ने कहा…

Kaash! Zindagee hame kisee ko apne rang me ragne kaa mauqa de!

14 मार्च 2011 को 7:56 pm

bahut sundar rang ...
kavita - dhara aakash vayu ... apni ye rachna vatvriksh ke liye bhejen rasprabha@gmail.com per parichay tasweer blog link ke saath

14 मार्च 2011 को 9:04 pm
Patali-The-Village ने कहा…

होली के रंग बिखेरती बहुत अच्छी अभिव्यक्ति| धन्यवाद|

14 मार्च 2011 को 9:32 pm

हर पलाश यही सोचने लगे तो रंग कौन भरेगा जीवन में।

14 मार्च 2011 को 10:32 pm
"पलाश" ने कहा…

palash ka phool apane aap mai anoothaa hai . uske binaa holi pori ho sakati hai , holi ka maza nahi.
"yahi kahataa hai hamase palash "

15 मार्च 2011 को 1:44 am
वन्दना ने कहा…

मैंने,
चुन रक्खे हैं पलाश
तुम्हारे ऊपर अपना रंग डालने को
एक बार तुम्हें
अपने रंग में रंगना चाहता हूँ

प्रेम की उत्तम अभिव्यक्ति…………ना जाने क्या क्या कह गयी……………कितना कहा और कितना अनकहा…………दिल को छू गयी आपकी ये रचना।

15 मार्च 2011 को 3:33 pm

बेहद सुन्दर अभिव्यक्ति

16 मार्च 2011 को 11:53 am
: केवल राम : ने कहा…

मैं,
तुमसे कोई सवाल नही करूँगा
लेकिन
मेरी चुप!
तुम बर्दाश्त नही कर पाओगी

वाह क्या बात कही है ..अक्सर जब कोई दिल में समाया होता है तो यही हाल होता है ..चुप रहा भी न जाए कहा भी न जाए ...आपका आभार इस सशक्त रचना के लिए

18 मार्च 2011 को 6:20 pm

तीनों रचनाएँ बेहतरीन हैं..... 'मैं' खासतौर पर अच्छी लगी..........होली की हार्दिक शुभकामनायें

18 मार्च 2011 को 9:24 pm
Babli ने कहा…

बहुत सुन्दर ! उम्दा प्रस्तुती!

आपको और आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनायें!

18 मार्च 2011 को 10:01 pm
BrijmohanShrivastava ने कहा…

होली का त्यौहार आपके सुखद जीवन और सुखी परिवार में और भी रंग विरंगी खुशयां बिखेरे यही कामना

20 मार्च 2011 को 6:52 pm

आप सभी आभार!

होली के अवसर पर रंगों में डूबी हुई शुभकामनाएं......

सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

21 मार्च 2011 को 10:18 am