.post-body { -webkit-touch-callout: none; -khtml-user-select: none; -moz-user-select: -moz-none; -ms-user-select: none; user-select: none; }

नेतागिरी आज के दौर में

शनिवार, 27 दिसंबर 2008

ना,
जाने कितनी गालियाँ खाई होंगी
कितनी गलियों की खाक छानी होगी
कितनी बार भूखे ही काटा होगा दिन
जूतियाँ कितनी घिसी होंगी यह तो पता नही

ना,
जाने कितनी बार गये होंगे जेल
धरने पर बैठे होंगे /
या की होगी भूख हड़ताल
कितनी बार जले होंगे पुतले /
कितनी बार कोसे गये होंगे /
कितनी बार गधे पर निकला होगा जुलूस
या कितनी बार मली गई होगी कालिख़ चेहरे पर

ना,
जाने कितनी बार दरियाँ बिछायी होंगी
कितनी बार साफ करें होंगे जूते
अकेले ही गला फाड़ा होगा चौराहों पर
और किसी तरह जुटायी होगी भीड़
कितने ही इल्जाम लगे होंगे चंदा खाने के
कड़ी मेहनत के बाद दामन
मुश्किल से बचाया होगा

ना,
जाने कितनी बार फूटी होंगी घर पे मटकियाँ
कितनी बार भेंट करी गई होंगी चूड़ियाँ
जूते की माला पहनाई गयी होगी
कितनी ही बार लोगो ने मुंडवाये होंगे सिर
फिर किया होगा मातम छाती पीटकर
निकाली होगी अर्थी
या किया होगा पिंडदान


पर,
एक बार भी हम मरें नही
अपने आप में
ना ही शर्मसार हुये
हम, सदा ही मुस्कुराते रहे
जो भी प्रदर्शन हुये / विरोध हुआ
सजता रहा तमगों की तरह सीने पर
भला,
कोई नेता बन पाया है /
या राजनीति कर पाया है आज के दौर में
इन सबसे परहेज किये हुये.
--------------------------------
मुकेश कुमार तिवारी
दिनांक : १८-दिसम्बर-२००८ / समय : १०:४५ रात्रि / घर

5 टिप्पणियाँ

वाह तिवारी जी आपने अपनी रचना में एक नेता की सारी अर्हताएं दर्शा दीं बहुत सुंदर ला-ज़बाब

28 दिसंबर 2008 को 10:02 am
'Yuva' ने कहा…

काफी संजीदगी से आप अपने ब्लॉग पर विचारों को रखते हैं.यहाँ पर आकर अच्छा लगा. कभी मेरे ब्लॉग पर भी आयें. ''युवा'' ब्लॉग युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अभिव्यक्तियों को सार्थक रूप देने के लिए है. यह ब्लॉग सभी के लिए खुला है. यदि आप भी इस ब्लॉग पर अपनी युवा-अभिव्यक्तियों को प्रकाशित करना चाहते हैं, तो amitky86@rediffmail.com पर ई-मेल कर सकते हैं. आपकी अभिव्यक्तियाँ कविता, कहानी, लेख, लघुकथा, वैचारिकी, चित्र इत्यादि किसी भी रूप में हो सकती हैं......नव-वर्ष-२००९ की शुभकामनाओं सहित !!!!

28 दिसंबर 2008 को 5:59 pm

सही कहा आपने. एक ये वाले हैं और एक वो वाले भी हैं जिनके बारे में बाबा नागार्जुन ने "मन्त्र" में कहा है -
हमेशा-हमेशा करेगा राज मेरा पोता
और
गद्दी पर आजन्म वज्रासन

28 दिसंबर 2008 को 11:14 pm
shyam kori 'uday' ने कहा…

... अत्यंत प्रसंशनीय अभिव्यक्ति है।

29 दिसंबर 2008 को 8:16 am
BrijmohanShrivastava ने कहा…

नये साल की हार्दिक शुभकामनाएं

29 दिसंबर 2008 को 12:41 pm