जब भी दर्द बटाँ दुनिया में
मेरे हिस्से ज्यादा आया
सबने सबकी सुध ले ली
अपने काम इरादा आया
सबको मिला वही जो चाहा
मेरे हक़ में वादा आया
कर्ज रात का आँखों में ले
सूरज संग तकादा आया
दुनियादारी लगी तमाशा
तब जाना क्यूं नादाँ आया
चेहरे पुते बहुत थे लेकिन
काम यही इक सादा आया
शाह वज़ीर मस्ती में डूबे
अपनी बारी प्यादा आया
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मुकेश कुमार तिवारी
दिनाँक : 01-जून-2011 / समय : 11:40 रात्रि / घर
मेरे हिस्से ज्यादा आया
सबने सबकी सुध ले ली
अपने काम इरादा आया
सबको मिला वही जो चाहा
मेरे हक़ में वादा आया
कर्ज रात का आँखों में ले
सूरज संग तकादा आया
दुनियादारी लगी तमाशा
तब जाना क्यूं नादाँ आया
चेहरे पुते बहुत थे लेकिन
काम यही इक सादा आया
शाह वज़ीर मस्ती में डूबे
अपनी बारी प्यादा आया
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मुकेश कुमार तिवारी
दिनाँक : 01-जून-2011 / समय : 11:40 रात्रि / घर