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महिला दिवस - विशेष

सोमवार, 8 मार्च 2021

मैंने माँ से पहचाना
एक स्त्री होना
कितना दुसाध्य है
कोई देवता हो जाने से

पहचाना
अपनी बहिनों से
कैसे वो जोड़े रखती हैं
एक घर को दूसरे से

सीख पाया
अपनी बेटियों से ही
कैसे परियाँ खिलखिलाती हैं
घर आँगन में

अनुभव कर रहा हूँ
कैसे एक नन्ही तितली
भर देती है खुशियों के रंग
और लगता है
जीवन शेष है अभी

इनके बाद 
जो दुनिया है 
या जो भी है मेरी दुनिया में
वो तुम हो
मैं तो केवल टुकड़ा टुकड़ा
विस्तार हूँ तुम सभी का...
@मुकेश कुमार तिवारी / 08-मार्च-2021

महिला दिवस पर हार्दिक अभिनंदन समस्त महिला शक्ति का...

3 टिप्पणियाँ

Anita ने कहा…

वाह ! बहुत सुंदर कविता

9 मार्च 2021 को 11:00 am

बहुत सुन्दर।
अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

9 मार्च 2021 को 6:05 pm

इसे कहते हैं अपनी जड़ों का मान

23 अप्रैल 2021 को 10:47 am